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पगडंडी- Experience share by IRS officer Mr. Avadhkishor




कॉलेज की पढ़ाई खत्म हुए दो साल बीत गए । फिर भी वैभव को दूर दूर तक नौकरी , काम धंधा नहीं सूझ पा रहा ।


           कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की अच्छी डिग्री और स्कूल में फर्स्ट डिवीजन की मार्कशीट बस घर की आलमारी में जगह ही घेर रहे है , किसी काम नहीं आ पाए।


           पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई का ये नतीजा जहां घर वालो को  उदास कर रहा था । पर वही मोहल्ले पड़ोस के स्कूल से पढ़ाई छोड़े लोगो के लिए वैभव की ये हालत मनोरंजन का साधन बन गई -

 "मौज मस्ती की होगी इंदौर में ,तभी ये हालत है । बाप का पैसा बर्बाद कर घर में बैठा है ।" 


           पर बेचारा ये बेरोजगार युवा क्या बताए इन लोगो को । 


           कितनी मेहनत से गणित ,विज्ञान और न जाने क्या क्या चीेजे स्कूल में याद करके कई रफ काफी पर परीक्षा की तैयारी की है हर class me। 


रट रट के गणित के सारे सवाल तैयार किए। विज्ञान को रटने में तो कितनी मेहनत की बेचारे ने..। 


रात दिन स्कूल ,फिर कोचिंग के चक्कर काट काट के बचपन खत्म कर दिया । घर में सबको लग रहा था कि पढ़ाई अच्छी चल रही है उसकी।


भले ही 80-85 percent हर क्लास में वैभव बना लेता था ,पर परीक्षा के बाद रत्ती भर भी याद नहीं रहता कि क्या पढ़ाई की। वहीं ज्ञान आज 24 साल की उम्र में 0 परसेंट काम आ रहा है..


क्या करेगा वह गणित में पढ़े sin ,cos , Alfa beeta gama , और इतिहास में पढ़े राजाओं की लड़ाई ,महानता का अब..।


और रही बात इंजीनियरिंग की तो छोटी छोटी एग्जाम गाइड से परीक्षा निकल जाती थी। परसेंट भी अच्छे बने ,पर आता कुछ नहीं था।


 वो करता भी क्या, सारा कॉलेज यही करता था। इन कॉलेज में इंजीनियर नहीं बनते थे ,बस डिग्री लेकर बेरोजगार बन जाते थे।


पर वैभव को एक बात समझ नहीं आ रही थी कि पास के है एक गांव का छोरा संजय कई जॉब्स के एग्जाम निकाल चुका है। 

यहां एक नौकरी नसीब नहीं हो रही है ,और उसको देखो तो धूम मचाए हुए है।


हर दिन गांव में घुट घुट के जीने से अच्छा कहीं भाग जाने के ख्याल न जाने कितनी बार उसके मन में आए। पर घर वाले भी कितनी बार पैसा लगाए उसके ऊपर। जैसे तैसे तो घर चलता था..


फिर एक दिन उसने संजय से उसके सक्सेस का तरीका पूछ ही लिया..."कैसे इतने जॉब्स के एग्जाम निकाल लेते हो यार..मै तो तरस गया हूं एक जॉब के लिए भी.."


( नोट:- 

दूरदराज गांवों ,छोटे शहरों के स्टूडेंट्स कई बार सही गाइडलाइंस की कमी से अच्छा कैरियर नहीं बना पाते। और जिंदगी भर इस कारण अपने आप को पिछड़ा महसूस करते है.. 

 एक कोशिश ,जिससे इस परिस्थिति को बदला जा सके...

अगले आर्टिकल में संजय जी की स्ट्रेटजी शेयर की जाएगी..

जय हिन्द )


Pic- साथी IPS ,IAS और राजभाषा अधिकारी दोस्तो के साथ मरीन ड्राइव ,रायपुर

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